Report of Presentation Workshop Delhi 22/04/12

बाएं से दायें (ऊपर):  अनूप, बलवीर, नितिन, सिकंदर, गोविन्द, अभिषेक, अमित, और जगदीश.

बाएं से दायें (नीचे):   डॉ. तबीश, अजीत, प्रभात, जितेंदर और प्रमेन्द्र.

दिल्ली SHG हर मीटिंग में कुछ नया और इनोवेटिव करने की कोशिश करती है, इस वर्कशॉप की थीम प्रजेंटेसन थी. यह वर्कशॉप इस बार ग्रेटर नोएडा में आयोजित की गयी थी. 

                वर्कशॉप में सबसे पहले अमित सर ने सभी पार्टिसिपेंट्स का स्वागत किया और एक नए मेंबर डॉ.ताबिश जावेद का TISA ने हार्दिक स्वागत किया.  उसके बाद हम सभी ने २ मिनट का मौनधारण किया ताकि सभी रिलैक्स हो जाएँ. उसके बाद प्रमेन्द्र सर ने वर्कशॉप के लिए कुछ ग्राउंड रुल बताये जिसमे बात यह थी की कोई भी किसी को बोलते वक़्त बीच में रोककर सलाह नहीं देगा.  
               अगला राउंड हमारा परिचय का राउंड था इसमे सभी ने बारी बारी से अपना परिचय दिया. और साथ ही अपना आज का motto बताया की आज वह किस ग्राउंड रुल पर ज्यादा फोकस करेंगे. परिचय के बाद प्रमेन्द्र ने सभी को stammering से जुडी कुछ  महत्वपूर्ण टेक्निक्स जैसे की बाउंसिंग , voluntary stammering, prolongation आदि के बारे में समझाया और उसके फायदे बताये तथा इन टेक्निक्स से जुड़े प्रशनों का जवाब दिया. 
               ग्राउंड रुल और टेक्निक्स पर चर्चा करते हुए सिकंदर सर और नितिन सर ने ”Acceptance” पर प्रकाश डाला और यह समझाया की Acceptance का मतलब क्या है. जिसका निष्कर्ष यह था की Acceptance का मतलब केवल यह मन लेना नहीं है की हम हकलाते हैं बल्कि Acceptance का मतलब यह है की हम अपनी समस्या को स्वीकार करके उसको कंट्रोल करने वाले उपायों का उपयोग करें तथा अगर हम किसी के सामने हकला कर बोलें तो हमें आत्मग्लानि न हो अर्थात हमें हकलाने के कारण अपने आप पर शर्म न आये हम अपने आपको न कोसें तथा हमारे अन्दर अपराधबोध की भावना जन्म न ले क्योंकि अक्सर जब हम कहीं हकला कर बोलते है तो उसके बाद हम स्वयं को कोसने लगते हैं. और हमें ऐसा महसूस होता है की हमने कोई अपराध कर दिया है. अर्थात हम अपनी stammering को स्वीकार नहीं करते.. हम यह सोचने में अपना समय नष्ट करते रहतें हैं की “मैं ऐसा क्यों हूँ?” या “यह मेरे साथ ही क्यों होता है?” जबकि यह गलत रवैया है. क्योंकि  जो होना था वह तो हो चुका है अब इसके स्थान पर हमें यह सोचना चाहिए की इससे मुक्ति पाने के लिए मुझे क्या करना चाहिए. सिकंदर सर, अनूप सर और नितिन सर ने Acceptance को इतनी अच्छी तरह समझाया की किसी को भी इस टॉपिक पर प्रश्न करने की आवश्यकता नहीं हुई. 
               अमित सर (जो की स्लो स्पीच के मास्टर हैं) ने स्लो स्पीच के बारे में बताया की किस प्रकार स्लो स्पीच हमारे लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है.  अमित सर ने बताया की अगर हम किसी शब्द को न बोल पायें तो हमें उस शब्द के हर लेटर को अलग अलग करके बोलना चाहिए. तथा इसका अभ्यास हम बुक रीडिंग करके और कस्टमर केयर को कॉल करके कर सकते हैं. कई पार्टिसिपेंट्स ने पूछा की अगर हम इतना धीरे-धीरे बोलेंगे तो सामने वाला हमारी बात सुनाने के लिए धीरज रख पायेगा?  तब अमित सर ने बताया की एक अच्छा वक्ता (orator) बनाने के लिए पहले हमें एक अच्छा सुननेवाला (good listener) बनना पड़ता है और जो व्यक्ति किसी की बात ध्यान से सुन नहीं सकता वह कभी अच्छा वक्ता बन ही नहीं सकता अर्थात यह उसकी समस्या है आपकी नहीं. 
               तत्पश्चात  सिकंदर सर, अनूप सर और नितिन सर ने इस बात पर भी चर्चा की कि S.H.G. मीटिंग हमारे लिए किस प्रकार हेल्पफुल है और हमें या किसी को भी स्पीच थेरेपिस्ट  की सहायता लेनी चाहिए या नहीं?  चर्चा का निष्कर्ष यह था की S.H.G. मीटिंग हमारे लिए बहुत हेल्पफुल है क्योंकि कोई भी टेक्निक चाहे वह कहीं से भी सीखी गयी हो उसे हम रियल वर्ल्ड में अपनाने से कतराते रहते है क्योंकि सभी टेक्निक्स हमें बनावटी और फनी लगाती है. लेकिन हम किसी भी टेक्निक को S.H.G. मीटिंग में बिना किसी हिचकिचाहट के try कर सकते हैं.  जबकि स्पीच थेरेपिस्ट हमें कुछ टेक्निक्स तो सीखा सकते हैं लेकिन हमें ऐसा कोई वातावरण प्रदान नहीं कर सकते जहाँ हम उन टेक्निक्स का अभ्यास कर सके.  लेकिन फिर भी TISA स्पीच थेरेपिस्ट या स्पीच थेरेपी का विरोध या समर्थन नहीं करती. स्पीच थेरेपिस्ट की सहायता ले या न ले यह फैसला पूरी तरह लोगों के विवेक पर निर्भर करता है.
               लंच की बाद हम सभी ने बारी बारी से अपनी अपनी प्रजेंटेसन पेश की और साथ ही प्रजेंटेसन से जुडी सभी पार्टिसिपेंट्स की शंकाओं और प्रशनों का उत्तर दिया.  लगभग सभी ने बहुत अच्छी तरह अपने प्रजेंटेसन पेश की और सभी की प्रजेंटेसन बहूत अच्छी और ज्ञानवर्धक थी.
               इस वर्कशॉप को सफल और ज्ञानवर्धक बनाने के लिए सभी पार्टिसिपेंट्स का हार्दिक धन्यवाद.  हम सभी ने जय प्रकाश, उमेश और सौरभ को मिस किया. आशा करते हैं की वे सभी अगली मीटिंग में हमारे साथ होंगे.
            
               धन्यवाद 
               जितेंदर गुप्ता प्रथम (jitenderguptaa@gmail.com)
12 Comments

Comments are closed.

  1. Anonymous 6 years ago

    Wow! Jitendra aap nai report bahut hi achchhi likhi. Bahut bahut dhanyavad. Ajeet ki report english mai pad kar bahut achcha laga and now aapki. We are really proud of our Delhi's telant. Keep it up.

    With regards
    Sikander

  2. admin 6 years ago

    bahut sunder delhi keep on inovating things

  3. admin 6 years ago

    Very nice post!! Jitendera,You write so good. Delhi shg is so fortunate that he got a new rockstar in form of you. Keep walking and sharing..

  4. Sachin 6 years ago

    अहा – मजा आ गया !
    असँख्य साधुवाद सभी को !

  5. admin 6 years ago

    Jitender, apki reports padh ke to maja aa jata hai. I still remember you as the guy with a GREAT smile 🙂 I will surely come to the SHG meets whenever I am in Delhi next time

  6. N.A. (Nagrath Anup) 6 years ago

    Great work Jitendra… you summarized the meeting in an excellent way… reading was like a flashback for me, i could revise all the lessons learn….. i believe you can make a career in writing… do you write poem/stories?

  7. admin 6 years ago

    Wow!!..Waqui jitendra aap ne bahut achhchi report likhi hai…keep sharing.

  8. Sachin 6 years ago

    TISA has a well considered policy on formal therapy:

    http://stammer.in/which-therapist-.html

  9. lashdinesh 6 years ago

    Dear Delhi folks,
    Please register your names under the below TISA directory of pws available at following link.

    http://t-tisa.blogspot.in/2012/04/do-you-want-to-connect-to-pws-in-your.html

    Thanks
    Dinesh.

  10. admin 6 years ago

    weldone jitendra keep it up…

  11. awesome..report buddy!!!
    just like your smile..:)

  12. admin 6 years ago

    mera utsah badhane ke liye aap sabhi ka bahut bahut dhanyavad.

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