राह दिखाता है बुरा वक्‍त . . .

बुरा वक्त ही हमको जीवन में सफल होने के रास्ते दिखाता है. जबकि अच्छा
वक्त ऐसा कर पाने में खुद तो नाकाम साबित होता ही है, साथ ही इंसान को भी
निकम्मा बना देता है. क्योंकि जब किसी का अच्छा वक्त चल रहा होता है तो वह
आराम तलबी का शिकार हो जाता है. बस यही आराम तलबी उसकी असफलता का कारण बन
जाती है. जबकि इसके विपरीत बुरे समय में ही आदमी अपनी सोई शक्तियों को
एकत्रित करने का प्रयास करता है, हर पल बुरे वक्त से लड़ता रहता है. ताकि
उसका बुरा वक्त किसी तरह उसको मुक्त कर दें. बुरे वक्‍त की छटपटाहट ही
इंसान को कुछ कर गुजरने के लिए मजबूर करती है. बुरे वक्‍त का चक्रव्‍यूह
इतना भी कठिन नहीं होता कि उसको भेदा न सके. बुरा वक्‍त हर इंसान जिंदगी
में जरूर आता है. 

आज अमिताभ बच्‍चन सफलता के आकाश पर जगमगाते सितारे है, पर
उनकी जिंदगी में भी एक वक्‍त ऐसा आया था, जब कर्ज में डूब रहे थे, लगता था
कि उनका दौर खत्‍म हो चुका है, लेकिन समय का बदलाव देखिए, आज वह कहां है.
जैसे हर रात के बाद दिन आता ही है, ठीक वैसे ही बुरे वक्‍त के बाद अच्‍छा
वक्‍त भी आता है, इसलिए अच्‍छे वक्‍त का इंतजार करने के साथ ही अपनी कमियों
को दूर करते रहना चाहिए, ताकि जब अच्‍छा वक्‍त आए, तो हम दोबारा न
लडखडाएं. अब यह इंसान की सोच पर निर्भर करता है कि वह बुरे वक्त से लड़ने
का साहस दिखाता है या फिर उसके आगे आत्म समर्पण करता है. जिसने आत्म समर्पण
किया, वह तो कभी सफल हो ही नहीं सकता. जिंदगी के अंधेरे रास्तों पर ही
उम्मीद की किरण दिखाई देती है. बुरे वक्त से लड़ने वाला इंसान इतना मजबूत
हो जाता है कि कोई भी बाधा उसको उसकी मंजिल पर पहुंचने से नहीं रोक सकती.
बुरा वक्‍त ही हमारा सबसे अच्‍छा गुरु होता है, वही हमको सफलता की ओर बढने
की प्रेरणा देता है. यह बुरे वक्‍त में हमको मालूम चलता है कि असलियत में
कौन हमारा है और कौन पराया. जब आप जीवन में सफल होते हैं; तब आप के दोस्तों
को पता चलता है, कि आप कौन हैं! जब आप जीवन में असफल होते हैं; तब आपको
पता चलता है, कि आप के दोस्त कौन हैं!
आंधियों को जिद है जहां बिजलियां गिराने की,
मुझे भी जिद है वहीं आशियां बसाने की………..
हिम्मत और हौसले बुलंद हैं, खड़ा हूं अभी गिरा नहीं हूं!!
अभी जंग बाकी है, और मैं हारा भी नहीं हूं!!
2 Comments

Comments are closed.

  1. Sachin 6 years ago

    बहुत सुन्दर – बहुत सच..

  2. admin 6 years ago

    न संख्या-शक्ति , न धन , न पाण्डित्य , न वाकचातुर्य……… , कुछ भी नहीं , बल्कि पवित्रता , शुध्द जीवन , साहस को विजय मिलेगी!
    क्या मार्ग मे बाधा आये बिना भी कभी नदियों का प्रवाह बढा है?
    -स्वामी विवेकानन्द

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