बोलने का मतलब, सब ठीक है ?

मेरे पिताजी को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती हुए अब 40 दिन बीत गए हैं। इस दौरान मैंने एक बात पर गौर किया है। हर रिश्तेदार, पड़ोसी और परिचित जब भी मिलते हैं बस एक ही सवाल पूछते हैं – पापा, बोलने लगे क्या?

मैंने इस बात पर चिंतन किया कि हमेशा लोग एक ही सवाल क्यों पूछते हैं? काफी विचार करने के बाद यह समझ में आया कि हम और हमारा समाज बोलने को अधिक महत्व देता है। अगर कोई व्यक्ति बातचीत कर रहा है तो यह समझा जाता है कि वह स्वस्थ होगा, वह ज्यादा होशियार, बु़िद्धमान और कुशल होगा।

वास्तव में समाज की यह मानसिकता ही हम हकलाने वाले व्यक्तियों के लिए चुनौती का कारण है। अगर आप धाराप्रवाह नहीं बोल सकते तो निश्चित ही सामाजिक भेदभाव, तिरस्कार का सामना करना पड़ता है।

हमें यह बात समझनी चाहिए कि सिर्फ धाराप्रवाह बोलना ही जीवन के लिए जरूरी नहीं है। हमें समाज के हिसाब से नहीं सोचना है, बल्कि अपनी संवाद की जरूरत के अनुसार कार्य करना चाहिए। यही करना ज्यादा श्रेयस्कर है।

– अमितसिंह कुशवाह,
सतना, मध्यप्रदेश।
09300939758

4 Comments

Comments are closed.

  1. Sachin 4 years ago

    Speech is a highly over-valued activity..
    Thinking- deep thinking- should be valued more.. and also good action in external world..

  2. एक दो अपवाद हो सकते हैं ..
    पर बोलना तो महत्‍वपूर्ण है ही !!

  3. admin 4 years ago

    Man is the only animal to whom God has gifted the power of speech and laugh.

  4. abhishek 4 years ago

    Rightly observed Amitji. In that case what can we say about the himalayan yogis..sometimes they take vow of silence for months at a time. We lose our peace of mind if we chatter all day long. We definitely need silence to rejuvenate our mind,and for concentration,and for self-discovery 🙂

CONTACT US

We're not around right now. But you can send us an email and we'll get back to you, asap.

Sending

Log in with your credentials

or    

Forgot your details?

Create Account