हकलाहट पर इंग्लिश में बातचीत का यादगार अनुभव

कल 6 जनवरी 2015 को मैं अपने आफिस में बैठा था। हमारा आफिस सतना शहर से 25 किलोमीटर दूर एक ग्रामीण क्षेत्र रामपुर बाघेलान में है। दोपहर के समय दो युवक आए। उन्हें देखकर मैं समझ गया कि ये लोग कुछ सामान बेचने के लिए आए हुए हैं।

उनमें से एक युवक ने इंग्लिश में बोलना शुरू किया। मैंने भी उन्हें इग्लिश में ही उत्तर दिया। मैंने कहा- मा-मा-माई ने-ने-नेम इ-इ-इज अ-अ-अमित सिं-सिंह-सिंह एण्ड आई एम ए पीपुल हू स्टैमर…

इसके बाद उन्होंने बताया कि वे कोलकाता से आए हुए हैं। ये दोनों इग्लिश और बांग्ला में ही बात कर रहे थे। हिन्दी बहुत कम जानते थे। एमबीए स्टूडेन्ट हैं और फाइनल ईयर के प्रोजेक्ट के तहत मार्केटिंग का कार्य करना है। उनके पास एक एनजीओ द्वारा बनाए गए हैण्डलूम प्रोडक्ट थे।
उस युवक ने बताया कि वे पिछले 2 घंटे से इस कस्बे में घूम रहे हैं, परन्तु कोई भी उनकी बात को नहीं समझ पा रहा है। सिर्फ आप ही ऐसे व्यक्ति मिले हैं, जो इग्लिश में उनसे बात कर पा रहे हैं।

मैंने उन्हें हकलाने के बारे में और टीसा के बारे में बताया। उन्हें जानकारी दी कि कोलकाता में मेरे 2 हकलाने वाले दोस्त हैं कुशल और प्रतिम।

इसके बाद उन दोनों ने अपना प्रोडक्ट दिखाना शुरू किया। मेन्स और वूमेन्स वियर के ढेरों आइटम उनके पास थे। मैंने उनसे इग्लिश में बातचीत कर काफी कुछ जानकारी प्रोडक्ट के बारे में लिया। साथ ही अपने काम के बारे में भी उन्हें बताया।

अंत में, हमारे आफिस से एक सज्जन ने 575 रू. का एक शर्ट पीस खरीदा। इन दोनों युवकों से बातचीत करना काफी अच्छा अनुभव रहा।

Outcomes –

1. हमें अपने आसपास और दैनिक जीवन में अनजान लोगों से बातचीत करने के अवसर जब भी मिलें पूरी कोशिश करना चाहिए कि उसका लाभ उठाएं। हकलाहट हो या भाषा संचार में बाधक नहीं हो सकती। आपको कम या गलत इंग्लिश आती हो तब भी बातचीत करिए। आप जितना अधिक बातचीत करेंगे, उतना ही आपके अंदर आत्मविश्वास जागृत होगा और आपका भाषा ज्ञान समृद्ध होगा।

2. इंग्लिश और बांग्ला भाषा जानने वाले युवक यदि हिन्दीभाषी क्षेत्र में आकर मार्केटिंग का काम करते हैं, तो यह एक काफी चुनौतीपूर्ण कार्य है। जब वे लोग ऐसा कर सकते हैं तो हम हकलाते हुए या किसी स्पीच तकनीक का इस्तेमाल करके अनजान लोगों से बातचीत करने का साहस दिखा सकते हैं।

3. भारत के किसी भी कोने, धर्म, सम्प्रदाय के व्यक्ति क्यों न हो, हमें उनसे अपने हकलाने के बारे में बातचीत जरूर करना चाहिए और उनकी प्रतिक्रिया जानने की कोशिश करना चाहिए। मैंने उन युवकों को बताया कि मैं हकलाता हूं तो उसने कहा कि क्या आप हैन्डीकैप्ड हैं? मैंने बताया कि नहीं, मैं सिर्फ हकलाता हूं, हैन्डीकैप्ड नहीं हूं।

4. जब आप एक बिल्कुल ही अलग परिवेश के लोगों से हकलाने के बारे में बातचीत करते हैं और उनकी प्रतिक्रिया सकारात्मक होती है, तो आपको अहसास होता है कि इतने सालों तक हम लोग जबरन ही अपनी हकलाहट को छिपाते हुए आ रहे है, जबरन ही हकलाहट को बोझ मानकर अपना समय और ऊर्जा व्यर्थ गंवाते रहे हें।

5. हम हकलाने के बारे में जितना अधिक दूसरे लोगों से बातचीत करते हैं, हममें आत्मविश्वास आता है। आत्मविश्वास घर पर बैठे रहने और सिर्फ हकलाहट के बारे में इंटरनेट, सोशल साइट्स पर ज्ञान बखारने या कमेन्ट करने से नहीं आएगा, उसके लिए हमें बाहर निकलना ही होगा, लोगों से बात करने के लिए।

6. मेरे लिए यह अवसर हकलाहट पर बातचीत करने और इंग्लिश में बातचीत करने की दृष्टि से बहुत ही यादगार और लाभदायक रहा है।

– अमितसिंह कुशवाह,
सतना, मध्यप्रदेश।
09300939758

3 Comments

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  1. admin 3 years ago

    बिल्कुल सही कहा हमें बाहर निकलना ही होगा लोगों से बात करने के लिए।

  2. Sachin 3 years ago

    सच है ! असली जिन्दगी और उसकी चुनौतियाँ तो औफलाइन हैं – इनसे हम कब तक बच बच के चलते रहेंगे ?

  3. admin 3 years ago

    आपने बिलकुल ठीक कहा है. जब हम एक अलग भाषा सिख सकते है जैसे मुझे इंग्लिश भाषा बोलने में काफी परेशानी होती है तो हम उसके लिए डिक्शनरी का इस्तेमाल करते है और अंग्रेजी बोलने का कोर्स करते है ज्यादा से ज्यादा लोगो से इंग्लिश में बात करने का प्रयाश करते है उसी तरह हमें हकलाहट को भी इसी तरह प्रैक्टिस से ही ठीक करना होगा चाहे उसके लिए कोई वर्कशॉप जाना पर या स्पीच थैरेपी लेनी हो या किसी तकनीक का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा करना हो बस इससे एक मिशन के रूप में लेना होगा और जी जान से इससे ठीक करने के लिए जो भी अपने अपने बस में हो वो करना होगा

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