मै क्यों करू शर्म !

हाल ही में,  मै सेंट्रल पार्क में बैठा था और बीच में एक स्टेज टाइप की जगह है वहां सर्किल में सारे लोग बैठे रहते है – कुछ परिवार वाले, कुक प्रेमी प्रेमिका, कुछ दोस्त और कुछ दोस्तों की मंडली, अचानक से मय वहां धुप लेने के लिए जा रहा था  कुछ वक़्त अपने स्वयं को देने और अचानक से मैंने देखा की एक लड़का जो कान में earphone लगाए dance कर रहा था और उसे होश नही की वो कैसी लीला था बिलकुल पागलपन लग रहा था मानो आखिर क्यों कोई अपना मजाक उड़वायेगा और वास्तव में सारे लोग उसी को देख रहे थे फिर मैंने सोचा की चलो इससे बात करते है बात करने पे मैंने पाया वो dance में बहुत जुनूनी है उसे दुनिया से कोई मतलब नही क्योंकि उसका मुख्य लक्ष्य था अपने dance पे फोकस करना तत्पश्चात मुझे ये एहसास हुआ की हम स्तंमरेर कितना डरे है लोगो के सामने हकलाने में जो निरर्थक है क्योंकि वास्तवितक को छुपकर हम अपने को दर्द ही दे रहे है और घुट रहे है क्योंकि वास्तविकता के बहाव का भी मजा ले और जिंदगी जिए और दोस्तों वास्तव में जो मजा आजादी में है वो मजा किसी और चीज में नही हम वास्तव में तब आजाद होंगे जब हमे दुसरो की सोच कभी परेशां नही करेगी या दूसरे के आवाजे विचलित नही करेगी ! हकलाओ मगर प्यार से !!!

2 Comments
  1. Profile photo of Amitsingh Kushwaha
    Amitsingh Kushwaha 3 months ago

    विशाल जी, बहुत अच्छा अनुभव है आपका. जीन्दगी के सरे बोझ उतारकर कर हम एकदम सहज हो जाएँ तो आनंद ही आनंद…

  2. Profile photo of Sachin
    Sachin 3 months ago

    बहुत सही, विशाल ! हम अपने को लेकर कुछ ज्यादा ही परेशां है.. दुनिया हमारे बारे में इतना नहीं सोच रही!! अपने “डांस” पे फोकस करने के बजाय हम दर्शको को लेकर परेशां है – न तो हमारा “डांस” अच्छा हो पता है और ना ही हम उन क्षणो को ढंग से एन्जॉय करते हैं..
    और लिखते रहिये इसी तरह..
    धन्यवाद्

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