किसी भी कमजोरी से उभरने के लिए आप खुद के लिए एक बेहतर टीचर हैं – सूरज पंचोली

अभिनेता सूरज पंचोली भी बचपन में हकलाते थे. जनसत्ता में उनका एक बहुत ही प्रेरणादायी इंटरव्यू प्रकाशित हुआ है.

बॉलीवुड में फिल्म हीरो से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अभिनेता सूरज पंचोली ने अपने बचपन की एक कमजोरी को सबके सामने जाहिर किया। हालांकि आज वो उस कमजोरी पर काबू पा चुके हैं। जी हां, दरअसल सूरज को बचपन में बोलने में दिक्कत होती थी। वह बोलते समय थोड़ा अटकते थे। आदित्य पंचोली के बेटे सूरज पंचोली अपनी पहली फिल्म हीरो में अच्छी डायलॉग डिलीवरी देते नजर आए। लेकिन एक वक्त था जब सूरज को एक शब्द बोलने में भी बहुत वक्त लग जाया करता था। लेकिन आज वह अपनी डायलॉग डिलीवरी बिना किसी रुकावट के देते हैं।

अंग्रेजी अखबार डीएनए की एक रिपोर्ट के मुताबिक सूरज को बचपन में हकलाने की आदत थी। यह उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सीक्रेट रहा है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपनी जवानी में कदम रखा तब भी हकलाना उनकी एक कमजोरी बनी हुई थी। लेकिन आज वह पूरी तरह से इस कमजोरी से उभर चुके हैं। आज वो बिना किसी रुकावट के अपने शब्द सामने वाले तक पहुंचा सकते हैं।

आज भी वह थोड़ा बहुत हकलाते हैं, जब वह अपने दोस्तों के साथ होते हैं। रिपोर्ट में सूरज के हवाले से लिखा गया है, ‘जब मैं अपने दोस्तों के साथ होता हूं, तब बिना झिझक के उनके साथ रहता हूं। उनके साथ होने पर कभी-कभी अटक भी जाता हूं। लेकिन मुझे इस बात का डर नहीं रहता कि वहां कोई मुझे इस आधार पर जज करेगा। मैं अपने दोस्तों के साथ काफी रिलैक्स फील करता हूं।’

इस दौरान उन्होंने कहा कि एक एक्टर के लिए प्रॉब्लम्स के साथ डील करना काफी टफ हो जाता है लेकिन एक्टिंग उनके लिए किसी थेरिपी से कम नहीं थी। उन्होंने कहा, ‘लंबे डायलॉग्स ने मुझे कॉन्संट्रेट करना सिखाया। इस दौरान जिन शब्दों में मुझे रुकावट आती थी, मैंने उन्हें बार बार रिपीट किया।’

सूरज का मानना है कि इस प्रॉब्लम से जूझने वालों को इस का सामना करना चाहिए। इसे एक्सेप्ट करना चाहिए। यह एक छोटा सा इशू है बस, इससे बहुत आसानी से निकला जा सकता है। वह बताते हैं कि बचपन से उनके अंदर इस कमजोरी से लड़ने की शक्ति थी। सूरज ने कहा, ‘यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप किसी चीज को कितना पॉजीटिव और कितना नेगेटिव लेते हैं।’

अपने जीवन के बारे में बताते हुए सूरज कहते हैं, जब कभी भी उनके दोस्त उनका मजाक उड़ाया करते थे, उनके पिता आदित्य पंचोली, मां जरीना वाहब और बहन सना पंचोली कभी भी उनमें खामिया नहीं निकालते थे।

25 साल के एक्टर सूरज बताते हैं कि 17 साल की उम्र तक उन्होंने कभी इस बात की परवाह नहीं की। जब उन्होंने करियर के तौर पर एक्टिंग को चुना तब उन्हें आखिरकार लगने लगा कि इस बारे में उन्हें कुछ करना चाहिए। इसके लिए उन्होंने किसी से कोई मदद नहीं ली। उन्होंने खुद इस कमजोरी पर काबू पाया और आज वो फ्लो के साथ अपनी बात कह सकते हैं। उनका मानना है कि किसी भी कमजोरी से उभरने के लिए आप खुद के लिए एक बेहतर टीचर हैं।

साभार – जनसत्ता

1 Comment
  1. Sachin 4 months ago

    धन्यवाद् अमित! बहुत से लोग मानते हैं की सारी पूर्णता वास्तव में इंसान के अन्दर ही है – जो उसके अपने प्रयास – या – समाज की मदद से बाहर आ जाती हैं.. यही सही शिक्षा का लक्ष्य है – या यूँ कहें – लक्ष्य होना चाहिए ! हमें सच्चे अर्थों में आत्म निर्भर और सक्षम बनाना.. यही तीसा का भी आदर्श है ..

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