पहल करने से मिलते हैं अवसर…


मैं अक्सर सोचता था- हर बार मुझे ही पहल क्यों करनी पड़ती है? पड़ोसी हो या आॅफिस के सहकर्मी हमेशा मुझे आगे होकर नमस्ते क्यों करना पड़ता है? हर बार मैं ही लोगों को फोन क्यों करूं? हर त्यौहार पर मैं ही लोगों को एसएमएस कब तक करता रहूंगा? इस तरह के सवाल अक्सर मुझे परेशान करते रहते थे।

मेरे शहर में एक पुराने मित्र हैं, नाम है अखिलेश। वे भी हकलाते हैं। आजकल मैंने कई मौकों पर अखिलेश के साथ जाना शुरू किया है। अखिलेश की खासियत यह है कि पलभर में ही वे लोगों को अपना बना लेते हैं। जिससे मिलते हैं, बस कुछ मिनट की मुलाकात में बोल देते हैं- आप मुझे बहुत अच्छे व्यक्ति लगे।

मेरा घर एक पाॅश काॅलोनी में है, जहां लोग एक-दूसरे से ज्यादा बातचीत करना पसंद नहीं करते। पास में ही एक अंकल रहते हैं। मैं रास्ते में
आते-जाते जब भी उनको देखता तो एकदम खामोश होकर निकल जाता। नमस्ते कहने की हिम्मत तक नहीं कर पाता था। अभी पिछले महीने मैं सुबह 6 बजे अपने आॅफिस जा रहा था। रास्ते में वे अंकल मिल गए। मैंने उनसे नमस्ते कहा। उन्होंने भी मुस्कुराकर मेरा अभिवादन स्वीकार किया। नमस्कार कितना बड़ा चमत्कार कर सकता है, इसके बारे में तो हम सभी जानते ही हैं।

बात चाहे बस या टेन में सफर की हो। हमें यह लगता है कि हम ही लोगों से क्यों बातें करें, कोई हमसे क्यों नहीं बोलता? सच तो यह है कि
हकलाने वाला व्यक्ति हो या सामान्य व्यक्ति सब यही सोचते हैं कि पहल कौन करें? इसी उधेड़बुन में सफर कट जाता है और हम सब अपने गंतव्य स्थान तक पहुंच जाते हैं।

अभी कल मेरे आॅफिस में एक महिला सहकर्मी का जन्मदिन हम लोगों ने खुशनुमा माहौल में मनाया। यह पहला मौका था जब हमारे आॅफिस में किसी का जन्मदिन मनाया गया, केट काटा गया। यह सब संभव हुआ पहल से। अगर मेरे एक सहकर्मी पहल नहीं करते तो शायद यह यादगार दिन कभी नहीं आता।

अगर हम गहराई से विचार करें तो पहल करने से न सिर्फ हमें आनन्द मिलता है, बल्कि हम दूसरों को भी खुश कर पाते हैं। हकलाने के मामले में तो पहल करना और भी जरूरी है। आप जितना अधिक खुद आगे होकर लोगों के बातचीत करना, उनके सुख-दुख में शामिल होना शुरू करेंगे  आपका जीवन उतना ही अधिक आनन्दमय बन जाएगा।

पहल करने की राह में बाधा है हमारा अहंकार और हमारा संकोच। पहल करने से पहले ही हम सोच लेते हैं, क्या मतलब है? लोग क्या कहेंगे? पता नहीं लोग मेरी बात सुनने में रूचि लेंगे या नहीं लेंगे? एक कुशल संचारकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक है हर समय, हर मौके पर खुद पहल करने के लिए तैयार रहना। फिर देखिए आपका सामाजिक दायरा आपको लोकप्रिय बना देगा।

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