It’s time to change.

हेलो फ्रेंड्स,मेरा नाम अक्षय रावल है. मै अभी कोयम्बटूर में रहता हूं।आज मैं यहां पर अपने आप मे जो बदलाव आया है.वह मै आप लोगो को बताना चाहता हु।

मै पिछले एक महीने से volunteering stammering का काफी यूज़ कर रहा हु।जिसमे मैं हरेक तकनीक को यूज़ करता हु।जो कि मैने सीखी है। टीसा से,सोशल मीडिया से।VS मै सब लोगो के साथ करता हु चाहे वह घरवाले हो या बाहरवाले सबके साथ करता हु.यह करने में मुझे मज़ा आता है.खुद से संतुष्ट भी होता हु यह करके और फर्क भी नज़र आ रहा है मेरे हावभाव में,मेरे विचार में।इसके साथ साथ मै अपने बॉडी लैंग्वेज पर भी काम कर रहा हु।जिससे मुझे उसमे भी बदलाव देखने को मिला है।अपने हाथों का सही से यूज़ करके लोगो समजा सकता हूँ आसानी से।

सोशल मीडिया पर पोस्ट करके  और अपने पुराने दोस्तो से फ़ोन पर बात करता हु मेरे हकलाने के बारे में,जिस कारण से मेरा acceptence का लेवल अब और भी बढ़ गया है। यह सब करके मुझे कुछ पॉजिटिव और नेगेटिव रिस्पांस मिलते है,पर चलता है,दोनों जरूरी है मेरे लिए।

इसके अलावा अपने वीडियो बनाये है उनको भी देखता रहता हूं.नोटिस करता हु खुद पर।ताकि में देख पाऊँ की कहाँ कहाँ मै गलतिया कर रहा हु.मेरी smile पर भी में काम कर रहा हु,क्योंकि मुझे लगता है कि मेरी smile जैसी होनी चाहिए वैसी नही है इसके लिए इसकी भी प्रैक्टिस करता हु लोगो के सामने।

अपने फोन कॉल्स की रिकॉर्डिंग को सुनता डेली, जिससे मुझे पता चले कि कहां मेरी आवाज दब रही है,उच्ची हो रही है,किस बात पर में मज़े से बोल रहा हु,कहाँ मैं बोलने का मज़ा नही ले रहा हु।इससे मुझे यह एहसास होता है कि अभी और कितना बाकी है मेरे टारगेट तक पहुचने के लिए। कुल मिलाकर मैं अपने आप पर भी टाइम दे रहा हु।देना भी चाहिए।इसके अलावा भी मुझे बहुत कुछ सीखना है और सीखता रहूंगा

अक्षय रावल,

Coordinator of Coimbatore TISA SHG group

1 Comment
  1. Satyendra 1 week ago

    Well done, Akshay! Hard work never goes waste…

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