अच्छी कोशिशों का नाम ही जिन्दगी है…

मेरे घर के पास एक सज्जन रहते हैं। वे इस समय थोडा मानसिक रूप से बीमार हैं। रास्ते में जब भी कोई  मिलता है, हर किसी से मुस्कुराकर नमस्ते करते है। मुझसे भी हमेशा नमस्ते करते है, जबकि मैं उनसे परिचित नहीं हूं। शायद वे मानसिक अवस्था ठीक नहीं होने के कारण ऐसा करते हैं। उनका ऐसा करना यह सोचने पर मजबूर करता है कि एक मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति भी एक अच्छी कोशिश कर रहा है, समाज के लोगों से जुडने की, उनसे बात करने की। इस व्यकित को इस बात की न तो चिन्ता है कि लोग क्या कहेंगे, और नही डर।
हम हकलाने वाले अक्सर इस डर से बात करने में कतराते हैं कि लोग क्या कहेंगे? इस दुविधा में हम बातचीत करने और बोलने के कई सुन्दर अवसर खो देते है। यह बहुत कुछ ऐसा है कि हमने बिना कुछ किए ही उसके परिणाम से डरकर खुद को समाज से अलग कर लिया। वास्तव में हम जब तक कोशिश नहीं करेंगे, तब तक किसी को सपना तो आता नहीं कि वह खुद जान जाएगा कि हम हकलाते हैं, और हमसे बात करेगा, हमारी मदद करेगा। 
एक दिन मैं अपने आफिस में अपने सहकर्मियों से बात कर रहा था, तब एक सहकर्मी ने कहा कि जब आप बात करते हैं, तो आपकी आंखें बन्द क्यों होने लगती हैं? मैंने बडी बेबाकी से उन्हें उत्तर दिया – सर, मैं बोलने में हकलाता हूँ। और जानते हैं इस पर उन्होंने किसी भी प्रकार कि नकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी। यानी कई  लोगों के लिए हमारा हकलाना ज्यादा मायने नहीं रखता। हम हकलाने वाले खुद ही इसे इतना ज्यादा महत्व देने लगते हैं कि अपना जीवन और अच्छी कोशिशें करना भूल जाते हैं।
जरा कल्पना कीजिए, उस मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति की जिसमें इतनी जागरूकता तो है कि वह लोगों का अभिवादन करता है, वह भी मुस्कुराकर। यह हमें सिखाता है कि हम जीवन के कितने ही बुरे दौर में हों, कितनी ही चुनौतियों का सामना कर रहे हों, हमेशा अच्छे प्रयास लगातार करते रहें। 
– अमितसिंह कुशवाह, 
सतना, मध्यप्रदेश।
मो- 09300939758  
3 Comments

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  1. Sachin 6 years ago

    बहुत सुन्दर..और उत्साहवर्द्धक..बुनियादी सच्चाई से भरा

  2. Sachin 6 years ago

    Courage is the ONLY cure, in final assessment..

  3. touch.vishwas 6 years ago

    Totally agreed with Amit.. I also strongly feel that we stammerers have more negative feelings towards stammering than the other people. Some 10% people may be there who may laugh and smile, but why to worry about minority when majority (90%) of the people are supportive.

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