उस दिन मैंने हकलाहट को दिल से स्वीकार किया और लोगों के इंटरव्यू लिया . . . !

हरबर्टपुर वर्कशाप से लौटने के बाद मैं 24 अप्रैल को अपने आफिस गया। इस वर्कशाप ने मेरे अंदर इतनी पाजीटिव एनर्जी भर दी थी कि अब मैं हकलाहट पर खुलकर बातचीत करने लगा। उस दिन आफिस पर मैंने एक ही दिन में हकलाहट पर 5 लोगों के इंटरव्यू लिया। ये व्यक्ति हैं पंकज अग्रवाल, परस्ते, अरूण कुमार, प्रकाश और सुदामाप्रसाद।
सबसे पहले मैंने उन्हें अपना पूरा परिचय दिया और बहुत ही हिम्मत के साथ एक वाक्य और जोड़ा कि मैं हकलाता हूं। इसके बाद मैंने उन सभी से हकलाहट में बारे में उनकी जानकारी प्राप्त करने के लिए कुछ सवाल पूछे।

कुछ लोगों ने कहा कि हकलाना एक जन्मजात बीमारी है तो किसी ने इसे विकलांगता कहा। एक उत्तर समान रहा कि एक एम्पलायर के होने पर वे हकलाने वाले व्यक्ति में योग्यता और गुण होने पर जॉब जरूर देंगे। इसी तरह सभी ने हकलाने वाले कैरेक्टर्स को फिल्मों पर दिखाने पर आपत्ति दर्ज की, जबकि एक व्यक्ति का कहना था कि ऐसा करना ठीक है, क्योंकि इससे आम लोग यह समझेंगे कि हकलाने वाले व्यक्तियों को क्या तकलीफ होती है बातचीत करने में।
सभी ने कहा कि हकलाने वाले व्यक्ति को बात करने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए। उसकी बात सुनी और समझी जाए। हकलाहट पर ध्यान न देकर उसकी बातों को गौर से सुनेंगे। साथ ही उन पर हंसना गलत है। इस इंटरव्यू के दौरान मैंने सभी को हकलाहट पर सही जानकारी दी और उन्हें बताया कि हकलाहट क्या है, क्या कारण हैं। हकलाने वाले व्यक्तियों की कैसे मदद करें आदि।
यह इंटरव्यू कई अर्थों में मेरे लिए यादगार रहा। पहला यह कि मैंने उस दिन जीवन में पहली बार खुलकर और खुशी मन से यह स्वीकार किया कि मैं हकलाता हूं। वर्ना अब तक मैं दुःखी होकर ही सबको बताता था कि मैं हकलाता हूं। एक दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि कई लोगों के लिए हमारा हकलाना कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। उनके लिए यह जरूरी है कि हकलाने वाला व्यक्ति जो बोल रहा है उसे अच्छे से समझ पाएं।
इन 5 लोगों के संक्षिप्त इंटरव्यू ने मेरी आंखें खोल दीं। वास्तव में हम हकलाने वाले अपनी जिन्दगी के कई साल इसी डर और शर्म में गुजार देते हैं कि लोग क्या कहेंगे, लोग क्या सोचेंगे हमारी हकलाहट के बारे में, जबकि सच तो यह है कि आज की दौड़ती-भागती जिन्दगी में किसी को आपके विषय में ज्यादा सोचने का टाईम ही कहां है।
– अमितसिंह कुशवाह,
सतना, मध्यप्रदेश।
मो. 0 9 3 0 0 9 3 9 7 5 8 
3 Comments

Comments are closed.

  1. subodh singh 6 years ago

    WOW…!! u are on the right path…Keep it up….Actually it is very difficult for a stammerer to talk on his stammering with other peoples, but u have done it…..dts great……!!!!!

  2. admin 6 years ago

    आज की दौड़ती- भागती जिन्दगी में किसी को आपके विषय में ज्यादा सोचने का टाईम ही कहां है।- 100% true

  3. Sachin 6 years ago

    Thank you Amit! Your post has highlighted the important fact: We pws should chase Communication skills rather than FLUENCY. In the long run- recovery from Stammering Mindset and good communication skills help much more than fluency..
    Keep exploring and sharing your experiences..Sorry for using English!!

    शर्म से आजाद हो कर अपनी बात दूसरो को सम़़झा पाना ज्यादा महत्त्वपूर्ण है – धाराप्रवाह बोलने के बजाय…

CONTACT US

We're not around right now. But you can send us an email and we'll get back to you, asap.

Sending

Log in with your credentials

or    

Forgot your details?

Create Account