आज मैं फोन पर ठीक से नहीं बोल पाया . . . !

आज सुबह एक व्यक्ति का मेरे मोबाइल पर काल आया। यह बातचीत महज 2 मिनट की थी। मैं कोई भी स्पीच तकनीक का इस्तेमाल किए बगैर बोलने की कोशिश कर रहा और बोल नहीं पाया। इसके बाद मुझे बहुत निराशा हुई कि आखिर क्यों मैंने कोई तकनीक यूज किए बिना जबरन बोलने का प्रयास किया।
कई बार मैं मार्किट जाता हूं तो रास्ते में सोचता हूं कि आज तो मैं बाउंसिंग में बोलूंगा। कभी-कभी दुकान पर पहुंचते ही यह बात भूल जाती है कि मुझे स्पीच तकनीक को फालो करना था। ऐसा भी होता है कि ज्यादा व्यस्त जगहों पर जहां लोगों को एक-दूसरे की बातों को सुनने का समय नहीं होता, वहां स्पीच तकनीक का प्रयोग करना मुश्किल हो जाता है।

हकलाहट को स्वीकार करने, डर और शर्म से उबर चुकने के बाद भी हकलाहट को नियंत्रित करने की कोशिशें करना या तो हम भूल जाते हैं या संकोचवश ऐसा नहीं कर पाते। हां, कभी-कभार कुछ हालात ऐसे होते हैं, जहां इनको फालो करना संभव नहीं हो पाता।
सही समय पर स्पीच तकनीक को यूज कर सार्थक सम्वाद किया जा सकता है। हम जैसे ही हकलाते हुए और जबरन बोलने का प्रयास करते हैं, वैसे ही हमारा कम्यूनिकेशन बाधित हो जाता है। वहीं दूसरी तरफ स्पीच तकनीक हमें थोड़ा समय लेकर सही बोलने के लिए प्रेरित करती है।
शुरूआत में यह बहुत कठिन लगता है कि मैं दूसरों के सामने ऐसे कैसे बोलूं। लेकिन जब इन सबका इस्तेमाल करना प्रारंभ कर देते हैं तो यह काफी आसान लगता है।
कुछ बातों का ध्यान रखें –
1. बोलने में शीघ्रता न करें, आराम से बोलें।
2. अगर आप किसी शब्द को नहीं बोल पा रहे हैं तो कुछ सेंकड का विराम लेकर फिर बोलें।
3. स्पीच तकनीक को जरूर फालो करें।
4. अगर बोलने में रूक जाते हैं तो इसे लेकर अपराधबोध या हीनता की भावना मन में न आने दें।
5. लगातार बोलने के अपने प्रयास को हर जगह जारी रखें।
6. अपनी स्पीच के लिए छोटे-छोटे टारगेट फिक्स करें जैसे- आज आपको क्या-क्या करना है, एक सप्ताह में आपको क्या करना है आदि।
7. अगर किसी कारणवश टारगेट पूरा न पाए तो उसे अगले दिन या सप्ताह के लिए तय करें।
8. विन्डो शापिंग एक बेहतर विकल्प है, स्पीच तकनीक के प्रयोग का।
अमितसिंह कुशवाह,
सतना, मध्यप्रदेश।
मो. 09300939758
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Post Author: Harish Usgaonker

1 thought on “आज मैं फोन पर ठीक से नहीं बोल पाया . . . !

    Sachin

    (May 25, 2013 - 7:47 am)

    You are right. Speech techniques are not magic. They cant cure the underlying neuro-biological issues- but they certainly help in getting the meaning across- which is the main purpose of talking.
    Please keep on sharing your thoughts which are based in real practice and experimentation….

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