हि – हि – हिंदी दिवस !

दोस्तों – हिंदी में लिखना इतना मुश्किल भी नहीं है – ये मैंने तब महसूस किया जब एक बार “अपना हाथ जगन्नाथ” का अनुवाद शुरू कर दिया ! और आज ये पूरा भी हो गया, ठीक हिंदी दिवस (१४ सितम्बर २०१५) के मौके पर! आप सभी जो हिंदी हिंदी की रट लगाये रखते थे, उन सभी का मै बहुत आभारी हूँ! अपने किये, ये कभी न होने वाला था! हेमंत ने हिंदी दिवस की बात याद दिला दी – बड़ा अच्छा हुआ| अमित कुशवाहा का योगदान भी अविस्मरणीय है – और वे सारे साथी जिन्होंने कम्युनिकेशन वर्कशॉप्स के दौरान अपने खट्टे मीठे अनुभव, अपनी छोटी बड़ी हार जीत, सपने और सच्चाई  – सब कुछ मेरे साथ बांटा, वे भी बधाई के पात्र हैं – क्योंकि हम सबने अपने हकलाने से जो कुछ भी सीखा है , यह पुस्तक उन्ही अनुभवों का निचोड़ है! इसे खुल कर बांटे! अपने साथियों को प्रिंट कर के एक प्रति भेंट करें| किसी विद्यालय में जायें तो एक प्रति उनके पुस्तकालय को भेंट करें| और सबसे महत्त्वपूर्ण – इसमें दिए गए क्रिया कलापों को अपने समूह में आजमाएं- और इनसे भी आगे जा कर कुछ नया सोचें, करें और बांटें | अगर आप का हकलाना कभी ठीक हुआ तो ये आपके अपने प्रयासों से ही होगा.. क्योंकि अपना हाथ ही जगन्नाथ है ! ये रहा लिंक:   अपना हाथ जगन्नाथ (हिंदी)   (पी डी ऍफ़  2.8 Mb) धन्यवाद!
(This is the Hindi version of “Apna Hath Jagannath”, the self help manual- as pdf file, 2.8 mb)

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Post Author: Sachin

7 thoughts on “हि – हि – हिंदी दिवस !

    admin

    (September 11, 2015 - 4:33 am)

    Apane haath ke hindi prakashan par aap sabo ko bahut bahut badhai.
    Yeh kabile taarif kaam hua.

    Vishal Gupta

    (September 11, 2015 - 4:50 am)

    mere paas words nhi hai sir aapke aur amit kushwaha ji ke liye…you both are superb mindblowing and outstanding because hindi version bahut jada hindustaniyo ko madad dega aur ye bahut sundar baat hai ki tisa ka help manual hindi me available ho gaya hai.

    I think TISA ne ek aur milestone ko cross kar liya hai #congratulation all TISIANS

    Sachin

    (September 11, 2015 - 9:34 am)

    Thx Vishal n Jasbir!

    admin

    (September 11, 2015 - 12:46 pm)

    सचिन सर और अमित कुसवाहा जी, आप दोनों का कोटि कोटि धन्यवाद ।
    आपने अपने भागीरथ प्रयत्नों से जो गंगा (hindi AHJ) धरती पर उतारी है, वो वर्षों तक कई हकलाने वालों का मार्गदर्शन करती रहेगी ।
    हिन्दी ही वह भाषा है, जिससे हम पूरे भारत मे communication संवाद कर सकते हैं और बहुत सारे PWS भाई इसकी मांग कर रहे थे । उन सब भाइयों की ओर से आपका कोटिशः धन्यवाद ।

    admin

    (September 13, 2015 - 2:52 pm)

    mughe smgh me nhi aa rha ki m Sachin sir and Amit Kushwaha ji ka kaise dhanywad krun. Sir maine muskil se english me book 1 bar padhi thi. or aaj hindi me whith in one hour. Thank you so much sir. Sir aap logon ko dekhkr lgta h ki maine bhi stammer hokr koi pap nhi kiya.

    Sachin

    (September 14, 2015 - 7:34 am)

    @Anurag Tetarwal: Koi paap nahi kiya. Lekin agar chaho to Punya dher sara kar sakte ho. Kaise? SHG chalakar, faila kar…

    Sanjay Kumar

    (November 5, 2015 - 12:54 pm)

    बहुत बहूत धन्यवाद सचिन सर और अमित जी अपने अपना हाथ जगन्नाथ का हिंदी अनुवाद करके ना जाने मेरे जेसे जाने कितने ही लोगों को हकलाहट का a से लेकर z तक का पाठ पढ़ा दिया।इस पुस्तक में जो ज्ञान समाहित हे ।उस ज्ञान से एक pws का आधा रास्ता आपने तय करवा दिया। बाकि का आधा रास्ता एक pws को ही तय करना होगा।

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