NC 2018 : सुंदर और यादगार पल …

मैं स्वेता रूपारेल गुजरात से हूँ। ये मेरी पहली नेशनल कॉन्फ्रेंस थी जिसको अटेंड करने के लिए में काफी समय से उत्साही थी। लेकिन कॉन्फ्रेंस के अनुभव मेरी उम्मीदों से भी कई गुना अच्छे रहे।

मैं और अंजन जी कॉन्फ्रेंस के एक दिन पहले रात को 9:30 के करीब पहुंचे। खाने का समय 8:30 तक ही था लेकिन देर से आने वाले साथियों के लिए भोजन चालू रखा गया था। खाने के बाद मुझे रूम दिया गया जिसमें सभी सुविधाएं उपलब्ध थीं।

29 सितंबर 2018 को कॉन्फ्रेंस का पहला दिन था। सभी पार्टिसिपेंट्स के चहरे पर उत्साह और स्माइल देख कर बहुत समय बाद इतनी पॉजिटिविटी का अनुभव हुआ। जिन साथियों से हैंगआउट पर मिलना होता था उनसे रूबरू मिल कर ऐसा लगा ही नही की पहली बार मिल रहे हैं।

टीसा के वरिष्ठ साथियों के प्रेरणादायक टॉक सुन कर आशा की नई किरण दिखी। अगर ये सब हकलाने के बावजूद अपने सारे सपने पूरे कर सकते है तो मैं भी कर सकती हूं। गेस्ट स्पीकर्स को सुन कर भी बहुत प्रेरणा मिली।

मेट्रो टॉक, मिनी SHG, ओपन माइक वगैरह में खुल कर पार्टिसिपेट करने का मौका मिला। साइकोलॉजी और भावनात्मक स्वास्थ्य से जुड़े टॉक सुन कर खुद में एक अलग शक्ति का संचार हुआ।

मेरे लिए सबसे बड़ी बात नए साथियो से मिलना था। सबकी अपनी अपनी स्ट्रगल, सफलता और सपनें थे। लेकिन सब एक दूसरे की निश्वार्थ भावना से मदद करने की कोशिश कर रहे है। अगर में नाम लिखूंगी तो जरूर कोई छूट जाएगा। जिंदगी में पहली बार ग्रुप में बोलते वक़्त इस बात की चिंता नही हो रही थी अगर में हकला गयी तो क्या होगा! पहली बार!

कॉन्फ्रेंस के अनुभव चाहे जितना भी लिखे कम है। वो पल जिंदगी के यादगार पलों में सबसे पहले आएंगे।

मैं बैंगलोर टीम का तहे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहूंगी। उन्हीं की दिन रात की कड़ी मेहनत की वजह से हमें ये यादगार अनुभव मिला। सारी बातों का इतना ध्यान रखने के बावजूद वो हमसे पूछ रहे थे कि आपको कोई असुविधा तो नही है! जबकि हमे उनसे पूछना चाहिए था कि आप कितनी रातों से ठीक से सोये नही होगे, हम आप का कैसे हाथ बटाएं।

मैं शुक्रिया अदा करना चाहूंगी टीसा के उन सभी साथियों का, जिन्होंने कई सालों से अपनी मेहनत से इस पौधे को सींच के बड़ा वृक्ष बना दिया है जिसकी छांव हम जैसे नए साथियों को मिल रही है।

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Post Author: Amitsingh Kushwaha

3 thoughts on “NC 2018 : सुंदर और यादगार पल …

    Satyendra Srivastava

    (October 7, 2018 - 4:33 pm)

    Wonderful!
    Amit ji, thank you for Excellent editing… Let us keep on promoting Hindi so that many more pws benefit…

    Bhupendra Singh Rathore

    (October 7, 2018 - 8:04 pm)

    हम सभी के साथ इस अनुभव को साझा करने के लिए धन्यवाद Sweta Di । इस ब्लॉग को पढ़ने के बाद, मुझे वास्तव में ऐसा लगता है, मैंने कुछ बड़ा खो दिया। आशा है कि आप किसी दिन अहमदाबाद एसएचजी मीटिंग / भोपाल एनसी में मिलेंगे और शायद Google hangouts में। Wish god gives lots of energy to you to embrace your stammer rest 362 days 🙂

    Harish Usgaonker

    (October 8, 2018 - 10:56 am)

    Nicely expressed Dr. Sweta. Great to meet you in person at the NC. Your presentation of MOOC had a lot of conviction…

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