ह्रदय चीर के राम सिया का

( हास्य )

जब मै बच्चा था , तब अक्सर भजन की ये पंक्ति सुन कर मुझे बहुत दुःख होता : हनुमान जी ने आखिर ऐसा क्यों किया?

मै  इलाहबाद में बड़ा हो रहा था।  भजन सुनने के  मौके अक्सर मिलते रहते थे।  आज कल बच्चे सुपरमैन के करतब देख कर बड़े होते हैं और हम हनुमान जी की कहानिया पढ़ कर खुश हो लेते थे।  सच तो ये है कि हनुमान जी हमें बहुत अच्छे लगते थे और मुश्किल घडी में हम उन्हें ही याद करते थे – जैसे क्लास में पिटने से पहले आदि!  मगर उन्होंने राम सिया का ह्रदय क्यों चीरा, ये समझ नहीं आता।  बाद में जब धैर्य से दूसरी लाइन सुनी और समझी, तब सब कुछ स्पष्ट हो गया :

ह्रदय चीर के राम सिया का
दर्शन दिया कराय …

यानि जब किसी ने उनकी भक्ति पर शक किया तो उन्होंने अपना ह्रदय चीर के उसमे सदैव बसने वाले राम सिया का दर्शन करा दिया और सभी भक्तो का दिल जीत लिया!

दर असल तीसा के साथ भी कई सालो से ऐसा ही कुछ हो रहा है।  “Accept your stammering” सुन कर कुछ लोग एक दम नाराज हो जाते हैं, कुछ भाग खड़े होते हैं , कुछ पत्थर उठा लेते है और कुछ मारने दौड़ते हैं !  कुछ तुरंत तीसा को ब्लैक लिस्ट कर देते हैं !  कुछ तुरंत बंगलोर या आमेर की बस पकड़ते हैं!

अक्सर ये साथी अपनी ही जल्दी में तीसा की पूरी बात नहीं सुनते – या सुन कर भी अनसुनी कर देते हैं या समझना ही नहीं चाहते और या तो समझने की काबिलियत नहीं रखते, राम जी की इच्छा से? क्या समझें? वास्तव में तीसा का मूलमंत्र है:

Accept stammering
But dont accept poor communication.

यानी, अपनी हकलाहट से निरंतर जूझने के बजाय उस से दोस्ती कर लो  और
संचार कौशल पे काम करो। अपने ख़राब संचार को मत स्वीकार करो।

अब ये बात मनोविज्ञान के तथ्यों पर आधारित है।  जब किसी विचार को हम दबाते हैं तो वह और बलवान हो जाता है। चेतन मन से भगाओ तो अवचेतन मन में घुस जाता है और सही मौके का इंतज़ार करता है – जैसे इंटरव्यू !!  इस तरह लुका छिपी का खेल बरसो चलता रहता है।  दूसरी ओर, जो इसको स्वीकार करके आगे बढ़ते है – पढाई, नौकरी, नाते रिश्ते आदि  पर ध्यान देते हैं , वो देर सबेर अपने मुकाम पे पहुँच जाते हैं।

वैसे भी हम जानते हैं कि हकलाने का कोई क्योर नहीं है।  हम ये भी जानते हैं कि तथा कथित “नार्मल’ लोग भी कभी कभी हकलाते हैं (कोई भी डिबेट शो देखिये, यकीन न हो तो ) । तो आखिर उनमे और हम में क्या फर्क है : वो इसे स्वीकार करके आगे बढ़ जाते हैं और हम रुक कर खुद को कोसते हैं और दूसरे क्योर सेंटर की तलाश में चल देते हैं।  तीसा सिर्फ यह कह रहा है कि इस न ख़तम होने वाली तलाश के बजाय क्यों न अपने कम्युनिकेशन स्किल्स पर काम करें और जिंदगी को आज भरपूर जियें ?

और ध्यान रहे संचार कौशल में बोलने से पहले और बहुत कुछ आता है – ध्यान से सुनना, समझना, प्रतिक्रिया देना, निगाहें मिलाना, शरीर की समुचित भाव भंगिमा का सही प्रयोग, कहने सुन ने लायक सामग्री (content) की तैयारी , दृश्य श्रव्य सामग्री आदि आदि ! यह सब छोड़ कर अगर मै सिर्फ “अच्छा बोलने ” के पीछे हाथ धो के पड जाऊं , राम जी की इच्छा से – तो आप क्या कहेंगे , राम जी की इच्छा ?

हमारी विधान सभा, लोक सभा आदि में ऐसे कई लोग हैं जो धारा प्रवाह बोलते हैं घंटों – मगर कहते कुछ नहीं !
(They speak a lot but communicate nothing!)

क्या आप भी कुछ कुछ वैसा ही बनना चाहते हैं? शायद नहीं।  तो अपने संचार कौशल पर काम करिये – और सिर्फ बातों से पेट नहीं भरता, इस लिए समाज में, अपने आस पास लोगों को कुछ ठोस सेवा दीजिये, उनकी सुनिए, उनसे जुड़िये ।  यही तीसा का “पूरा” सन्देश है।

“ACTION  SPEAKS  LOUDER  THAN  WORDS”

Post Author: Sachin

1 thought on “ह्रदय चीर के राम सिया का

    S. LAKSHMINARAYANA

    (August 15, 2020 - 7:38 pm)

    Acceptance of our stammering is very important to overcome our stammering. Sachin Sir’s posting is very inspiring.

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