Children

You have a child who stammers?

Listen to the child, Practice what you preach

एक राजकुमारी, जो थी हकलाती… बच्चों के लिए एक कहानी… और बड़ों के लिए सीख

Teach By Example

As of now, there is not very much by way of therapy which could be given to a child DIRECTLY. But dont panic. You can still do a LOT- and the child may have a complete recovery too. Chances of recovery is highest among children, as compared to adults- that is, before psychological changes take deep roots in our personality. A useful principle is – keep an open, accepting atmosphere at home, where any topic can be discussed, including stammering, without embarrassment, shame or fear. Your attitude to stammering is absorbed by the child too. If you find it “frightening”, child too will be scared and try to hide it. If you can take it as “no big deal”, child too will learn to deal with it calmly.

No matter, how child speaks, you must not give negative reactions unconsciously. But yes, you may say the same word without struggle as a way of “teaching”. Remember, s/he does not have CONTROL over his speech and reactions to difficulties. She may learn unconsciously from you- that is a possibility. So, spend a lot of time with child in activities which involve lot of spontaneous chat- reading stories together or interactive play.  Bed time stories, where you tell part of it and the child tells the remaining story can be a very useful approach.

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Accept, Learn, Discuss

Don’t treat stammering as a taboo. Also, dont allow teasing at home and school. Talk to the teacher / Principal. Instead of asking child to slow down, it is better for adults and other siblings to slow down ie. demonstrate the behavior rather than demand it, from a child who is already trying to do her best. For more ideas read these detailed suggestions from Stuttering Foundation of India: Hindi (Link). Read other resources above too: a well-informed parent or sibling is the best support for a CWS. Finally, also consider, what do you achieve and lose in the process, when therapist and the family “encourages” the child to adapt a new manner of talking, a new way of looking at “talking”? What does the child gain and lose? Here is a parable to think about..

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Seven stories to read to your child

सात सुझाव

अपने बच्चे से बातचीत करने के लिए सात सुझाव

(साभार – स्टटरिंग फॉउन्डेशन ऑफ अमेरिका, से)

 

विशेषज्ञों के अनुसार, हकलाने वाले बच्चे यदि आराम से, समय लेकर बातचीत करते हैं, तो धाराप्रवाह बोलने में उन्हें काफी मदद मिलती है। यहां पर अभिभावकों के लिए सुझाव दिए जा रहे हैं कि वे कैसे अपने बच्चे की अच्छा बोलने में मदद कर सकते हैं।

 

  1. अपने बोलने की गति को कम करना अपने बच्चे से बातचीत करते समय धीमी गति में आराम से बात करें।  लगातार न बोलकर, बीचबीच में रूककर बोलें। बच्चे को अपनी बात पूरी कहने दें, उसके बाद कुछ सेकण्ड रूककर बोलें। आपका आसान और आरामदायक तरीके से बातचीत करने का तरीका बच्चे के लिए कारगर साबित होगा। “धीरे बोलो, दोबारा बोलने की कोशिश करो”, जैसे निर्देश देने की अपेक्षा अगर आप खुद बच्चे के साथ यह तरीका अपनाएं तो अधिक प्रभावी होगा। अगर बच्चे की दिनचर्या ही निरंतर भागमभाग के बजाय थोड़ी तनावमुक्त (रिलैक्सड) बना दी जाय, तो बहुत से बच्चों को इस से अच्छा बोलने में बड़ी मदद मिलेगी । 

 

  1. पूरा सुनना जब बच्चा आपसे कुछ कह रहा हो तो उसकी पूरी बात ध्यान से, आराम से सुनें। बीच में न रोकें। अन्य व्यवधानों (जैसे फोन आदि) को कुछ समय के लिए स्थगित कर दें या बंद ही कर दें। ऐसे अवसरों को ढूंढे जब आप पूरी तन्मयता से बच्चे की बात सुन सकें – जैसे रात में सोने से पहले, इतवार की सुबह आदि । 

 

  1. सवाल पूछना सवाल पूछना दैनिक जीवन में एक आम बात है। परन्तु कोशिश करें कि बच्चे से एक साथ कई सारे सवाल न पूछ डालें। इससे बच्चा अपनी पूरी बात सही तरीके से नहीं कह पाएगा। एक सवाल पूछें, जब उसका उत्तर मिल जाए तब दूसरा सवाल पूछें। कई बार अपनी छोटी सी प्रतिक्रिया दे कर चुप हो जाने पर बच्चा स्वयं ही आगे बोलता है और आपको सवाल पूछने की जरुरत ही नहीं पड़ती !

 

  1. समय आने पर बोलना – सुनिश्चित करें कि परिवार के सभी सदस्य अपनी अपनी बारी आने पर बोलें और सुनें भी। बार बार टोके जाने पर बच्चे बोलना काफी मुश्किल पाते हैं।

 

  1. आत्मविश्वास बढ़ाना अपने बच्चे की अच्छी आदतों, रूचियों और उपलब्धियों की उदहारण देकर तारीफ करें। जैसे– “तुमने जैसे आज अपना होमवर्क खुद ही पूरा कर डाला, यह मुझे बहुत अच्छा लगा!” । हकलाने के आलावा अन्य दूसरे क्षेत्रों में भी बच्चों की प्रशंसा करें, जैसे :  अच्छा खेलने पर, सुन्दर चित्र बनाने या गाने पर, समय पर काम पूरा करने पर, किसी की सहायता करने पर, अपना काम खुद करने पर, अपना सामान सुव्यवस्थित रखने आदि पर।

 

  1. विशेष समय अपने बच्चे से हर दिन समय निकालकर बातचीत जरूर करें। ऐसे मौकों पर टीवी, कम्प्यूटर, वीडियो गेम, सेलफोन आदि बंद कर दें और उसकी बात पर पूरा ध्यान दें । आपका ऐसा पांच मिनट भी उसके आत्म विश्वास को बेहद बढ़ा सकता है।

 

  1. सामान्य नियमों का पालन करें – अनुशासन के मामले में आप जिस तरह सामान्य बच्चों से पेश आते हैं, उसी तरह हकलाने वाले बच्चे से भी पेश आएं। जीवन के अन्य पहलुओं में उसे किसी छूट या विशेष समायोजन की जरुरत नहीं।
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आठ सुझाव शिक्षकों के लिए

शिक्षकों के लिए आठ सुझाव

(साभार – स्टटरिंग फॉउन्डेशन ऑफ अमेरिका, से)

 

  1. बच्चे से यह न कहेंधीरे से बोलो, आराम से बोलो, क्या जल्दी है? आदि।इस से कोई मदद नहीं मिलती। उल्टे बच्चा और दबाव महसूस करता है ।  

 

  1. जब आप किसी बच्चे से बातचीत कर रहे हों और वह अटक जाए तो उसके शब्दों को बोलने की कोशिश न करें। इस से उसका आत्मविश्वास और कम हो जाता है । 

 

  1. क्लास के सभी बच्चों में अपनी बात बारी आने पर कहने और ध्यान से सुनने की आदत विकसित करें। हकलाने वाला बच्चा अपनी बात बेहतर ढंग से कह पाता है जब अन्य उसकी बात पूरे ध्यान से सुन रहे हों और उसे बीच में टोक न रहे हों।

 

  1. बच्चे जो हकलाते हैं, या नहीं हकलाते हैं, सभी में एक समान गुण या कार्य करने की क्षमता होती है, इस बात को ध्यान में रखें । हकलाने वाले बच्चों से उसी गुणवत्ता और उतने ही काम की उम्मीद करें जितनी अन्य बच्चों से करते हैं।उन्हें किसी रियायत की जरुरत नहीं । 

 

  1. ऐसे बच्चों से जब भी बात करें तो आराम से और बीच बीच में रूक कर बातचीत करें।

 

  1. बच्चा क्या बोल रहा है इस पर ध्यान दें, बच्चा कैसे बोल रहा है इसे नजरअंदाज करें।यह जाहिर करें की वस्तुतः आप की रूचि कथ्य में है, न कि कथन शैली में । 

 

  1. ऐसे बच्चे जिन्हें कक्षा में बोलने में मुश्किलें आती हैं और जिन्हे  इस वजह से सहयोग की आवश्यकता हो, उनसे अकेले में बातचीत करें और उनकी जरूरत को समझें। जैसे हो सकता है कि बच्चा रोलकॉल, बोलने के बजाय, हाथ खड़ा कर के देना चाहे । मुमकिन है कि वह मौखिक परीक्षा (वाइवा )  सब से  पहले  या अकेले  में देना चाहे आदि । 

 

  1. हकलाहट को शर्म या मज़ाक का विषय कदापि न बनाएं। हकलाहट को भी एक अन्य मुद्दे की तरह लेते हुए सामान्य ढंग से बातचीत करें।
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