Parents & Teachers

बच्चे को ये बताना न भूलें

१. कि आप उसे हकलाने के बावजूद अन्य बच्चो की तरह ही प्यार करते हैं और करते रहेंगे

२. कि हकलाना कोई बड़ी समस्या नहीं है और इसमें उसका कोई दोष नहीं है

३. कि हकलाने के बारे में आप हमेशा खुल कर बात करने को तैयार हैं

४. हमें तुम्हारी कई बातों पे गर्व है

५. तुम कभी अकेले नहीं – मै हर हाल में तुम्हारे साथ हूँ (अगर जरुरत है तो जरूर उसके स्कूल में बात करिये)

६. तुम “नार्मल” हो और कभी कभी हकलाते हो – इस में कोई समस्या नहीं है

७. तुम्हारे हकलाने से मुझे कोई तकलीफ नहीं है – तुम जितना चाहे समय लो और बात करो

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सात सुझाव अभिभावकों के लिए

अपने बच्चे से बातचीत करने के लिए सात सुझाव

(साभार – स्टटरिंग फॉउन्डेशन ऑफ अमेरिका, से)

 

विशेषज्ञों के अनुसार, हकलाने वाले बच्चे यदि आराम से, समय लेकर बातचीत करते हैं, तो धाराप्रवाह बोलने में उन्हें काफी मदद मिलती है। यहां पर अभिभावकों के लिए सुझाव दिए जा रहे हैं कि वे कैसे अपने बच्चे की अच्छा बोलने में मदद कर सकते हैं।

 

  1. अपने बोलने की गति को कम करना अपने बच्चे से बातचीत करते समय धीमी गति में आराम से बात करें।  लगातार न बोलकर, बीचबीच में रूककर बोलें। बच्चे को अपनी बात पूरी कहने दें, उसके बाद कुछ सेकण्ड रूककर बोलें। आपका आसान और आरामदायक तरीके से बातचीत करने का तरीका बच्चे के लिए कारगर साबित होगा। “धीरे बोलो, दोबारा बोलने की कोशिश करो”, जैसे निर्देश देने की अपेक्षा अगर आप खुद बच्चे के साथ यह तरीका अपनाएं तो अधिक प्रभावी होगा। अगर बच्चे की दिनचर्या ही निरंतर भागमभाग के बजाय थोड़ी तनावमुक्त (रिलैक्सड) बना दी जाय, तो बहुत से बच्चों को इस से अच्छा बोलने में बड़ी मदद मिलेगी । 

 

  1. पूरा सुनना जब बच्चा आपसे कुछ कह रहा हो तो उसकी पूरी बात ध्यान से, आराम से सुनें। बीच में न रोकें। अन्य व्यवधानों (जैसे फोन आदि) को कुछ समय के लिए स्थगित कर दें या बंद ही कर दें। ऐसे अवसरों को ढूंढे जब आप पूरी तन्मयता से बच्चे की बात सुन सकें – जैसे रात में सोने से पहले, इतवार की सुबह आदि । 

 

  1. सवाल पूछना सवाल पूछना दैनिक जीवन में एक आम बात है। परन्तु कोशिश करें कि बच्चे से एक साथ कई सारे सवाल न पूछ डालें। इससे बच्चा अपनी पूरी बात सही तरीके से नहीं कह पाएगा। एक सवाल पूछें, जब उसका उत्तर मिल जाए तब दूसरा सवाल पूछें। कई बार अपनी छोटी सी प्रतिक्रिया दे कर चुप हो जाने पर बच्चा स्वयं ही आगे बोलता है और आपको सवाल पूछने की जरुरत ही नहीं पड़ती !

 

  1. समय आने पर बोलना – सुनिश्चित करें कि परिवार के सभी सदस्य अपनी अपनी बारी आने पर बोलें और सुनें भी। बार बार टोके जाने पर बच्चे बोलना काफी मुश्किल पाते हैं।

 

  1. आत्मविश्वास बढ़ाना अपने बच्चे की अच्छी आदतों, रूचियों और उपलब्धियों की उदहारण देकर तारीफ करें। जैसे– “तुमने जैसे आज अपना होमवर्क खुद ही पूरा कर डाला, यह मुझे बहुत अच्छा लगा!” । हकलाने के आलावा अन्य दूसरे क्षेत्रों में भी बच्चों की प्रशंसा करें, जैसे :  अच्छा खेलने पर, सुन्दर चित्र बनाने या गाने पर, समय पर काम पूरा करने पर, किसी की सहायता करने पर, अपना काम खुद करने पर, अपना सामान सुव्यवस्थित रखने आदि पर।

 

  1. विशेष समय अपने बच्चे से हर दिन समय निकालकर बातचीत जरूर करें। ऐसे मौकों पर टीवी, कम्प्यूटर, वीडियो गेम, सेलफोन आदि बंद कर दें और उसकी बात पर पूरा ध्यान दें । आपका ऐसा पांच मिनट भी उसके आत्म विश्वास को बेहद बढ़ा सकता है।

 

  1. सामान्य नियमों का पालन करें – अनुशासन के मामले में आप जिस तरह सामान्य बच्चों से पेश आते हैं, उसी तरह हकलाने वाले बच्चे से भी पेश आएं। जीवन के अन्य पहलुओं में उसे किसी छूट या विशेष समायोजन की जरुरत नहीं।
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आठ सुझाव शिक्षकों के लिए

शिक्षकों के लिए आठ सुझाव

(साभार – स्टटरिंग फॉउन्डेशन ऑफ अमेरिका, से)

 

  1. बच्चे से यह न कहेंधीरे से बोलो, आराम से बोलो, क्या जल्दी है? आदि।इस से कोई मदद नहीं मिलती। उल्टे बच्चा और दबाव महसूस करता है ।  

 

  1. जब आप किसी बच्चे से बातचीत कर रहे हों और वह अटक जाए तो उसके शब्दों को बोलने की कोशिश न करें। इस से उसका आत्मविश्वास और कम हो जाता है । 

 

  1. क्लास के सभी बच्चों में अपनी बात बारी आने पर कहने और ध्यान से सुनने की आदत विकसित करें। हकलाने वाला बच्चा अपनी बात बेहतर ढंग से कह पाता है जब अन्य उसकी बात पूरे ध्यान से सुन रहे हों और उसे बीच में टोक न रहे हों।

 

  1. बच्चे जो हकलाते हैं, या नहीं हकलाते हैं, सभी में एक समान गुण या कार्य करने की क्षमता होती है, इस बात को ध्यान में रखें । हकलाने वाले बच्चों से उसी गुणवत्ता और उतने ही काम की उम्मीद करें जितनी अन्य बच्चों से करते हैं।उन्हें किसी रियायत की जरुरत नहीं । 

 

  1. ऐसे बच्चों से जब भी बात करें तो आराम से और बीच बीच में रूक कर बातचीत करें।

 

  1. बच्चा क्या बोल रहा है इस पर ध्यान दें, बच्चा कैसे बोल रहा है इसे नजरअंदाज करें।यह जाहिर करें की वस्तुतः आप की रूचि कथ्य में है, न कि कथन शैली में । 

 

  1. ऐसे बच्चे जिन्हें कक्षा में बोलने में मुश्किलें आती हैं और जिन्हे  इस वजह से सहयोग की आवश्यकता हो, उनसे अकेले में बातचीत करें और उनकी जरूरत को समझें। जैसे हो सकता है कि बच्चा रोलकॉल, बोलने के बजाय, हाथ खड़ा कर के देना चाहे । मुमकिन है कि वह मौखिक परीक्षा (वाइवा )  सब से  पहले  या अकेले  में देना चाहे आदि । 

 

  1. हकलाहट को शर्म या मज़ाक का विषय कदापि न बनाएं। हकलाहट को भी एक अन्य मुद्दे की तरह लेते हुए सामान्य ढंग से बातचीत करें।
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Learning for Parents

Advice for Parents

7 tips for talking with your child

Your Child Stammers?

Has your child started stammering? Don’t worry. There are over 12 million successful adults in India who stammer, and over 70 million worldwide – 1% of the population. Stammering is simply a different way of speaking. With that said, there is A LOT you can do to avoid psychological changes taking deep roots in your child’s personality that will make him/her feel ashamed of the way they speak. Decades of research put simply: accept your child wholeheartedly including his/her stammering. He/she is not stammering on purpose, and it is normal to stammer.

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Teach By Example

As of now, there is not very much by way of therapy which could be given to a child DIRECTLY. But dont panic. You can still do a LOT- and the child may have a complete recovery too. Chances of recovery is highest among children, as compared to adults- that is, before psychological changes take deep roots in our personality. A useful principle is – keep an open, accepting atmosphere at home, where any topic can be discussed, including stammering, without embarrassment, shame or fear. Your attitude to stammering is absorbed by the child too. If you find it “frightening”, child too will be scared and try to hide it. If you can take it as “no big deal”, child too will learn to deal with it calmly.

No matter, how child speaks, you must not give negative reactions unconsciously. But yes, you may say the same word without struggle as a way of “teaching”. Remember, s/he does not have CONTROL over his speech and reactions to difficulties. She may learn unconsciously from you- that is a possibility. So, spend a lot of time with child in activities which involve lot of spontaneous chat- reading stories together or interactive play.  Bed time stories, where you tell part of it and the child tells the remaining story can be a very useful approach.

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Accept, Learn, Discuss

Don’t treat stammering as a taboo. Also, dont allow teasing at home and school. Talk to the teacher / Principal. Instead of asking child to slow down, it is better for adults and other siblings to slow down ie. demonstrate the behavior rather than demand it, from a child who is already trying to do her best. For more ideas read these detailed suggestions from Stuttering Foundation of India: Hindi (Link). Read other resources above too: a well-informed parent or sibling is the best support for a CWS. Finally, also consider, what do you achieve and lose in the process, when therapist and the family “encourages” the child to adapt a new manner of talking, a new way of looking at “talking”? What does the child gain and lose? Here is a parable to think about..

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Bed Time Story Telling

Bed time Story Telling

This can be a very useful activity, if done regularly and if the child too is encouraged to participate. Imagine open ended stories with a character who stammers. Come up with creative story lines. Let it be a dedicated half an hour every night.

एक राजकुमारी, जो थी हकलाती… बच्चों के लिए एक कहानी… और बड़ों के लिए सीख

इज़ाबेला 

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कहानी सुने और सुनायें

Watch together

This video below where children are talking about their stammering i worth wtching with your child. It will help both of you to discuss it.

Kid to Kid

Teachers have a BIG role

Encourage the Child

Accept the child like any other. Let her or him read in the class, like other students. Maintain good eye contact, listen calmly and ask questions when the child talks to you. Encourage him to talk more in the class and elsewhere. Do not tolerate if the child is bullied, mocked or harassed by other children. Let other children know that such behavior is wrong and why. This page gives suggestions for both parents and teachers. Many parents may not know that their child stammers in the school and is facing difficulties. You may pass on these ideas to the parents of the child during Parent Teacher meetings. Valuable ideas for both parents and teachers in Hindi (Link)

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Dont Wait for the Expert!

Many schools have Special Educator today. Take help from them. Child does not need any concession in home work, study or reading in class – if teacher and other students are supportive. Encourage open discussion in class. Let the child make a presentation on what stammering is. Bullying and Teasing MUST be stopped in school, since it has a long term detrimental effect on child’s communication skills and attitude. Dont doubt your capacity to help a child successfully. He may never get a chance to go to a speech therapist. You can certainly help.

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Some Amazing Teachers

Hats off to this teacher – ERICA! See how little actions can have big effects on children! Read the full story here.

Another teacher shares how she helps students who stammer in her class here; Especially see the last paragraph. To such teachers, we have only one thing to say: Gurur Brahma, Gurur Vishnu… (Teacher is the God in human form, we bow to you, ever!)

TISA has many pws, who thought they would never make a teacher. But they did. They discovered that students too are more interested in what they had to offer rather than their manner of speaking. Then, there are many of us who are in different fields, but who conduct workshops, teach, coach and so on. Stammering in the child or the teacher- is just that: stammering. Nothing more. It is not eternal damnation! Many children who stammered, became good students and later, became excellent teachers too. Let no assumption or stereotype come between you and your student.

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What Students Have to Say

We did have some VERY good teachers (like above) and some not so sensitive- or may be, they just did not know what to do with us, when we were in a block! Many of us have painful memories of growing up where no one understood us and our dark secret – our stammering. It is better that we share it now. So that everyone gets better informed and things change.. may be?

I hate my school.

The Frightening Day.

A real story

The English Teacher

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