From our FB page

मेरा नाम स्वाति रावत है में बेतुल मध्य प्रदेश
में रहती हू, हकलाने वाले लोग इस बात को लेकर शर्म करते है जैसा कि में भी
करती थी पर अब इसमें काफी अंतर आया जबसे टीसा के ब्लोग्स रीड करने लगी ,
हकलाना एक अँधेरी गुफा कि तरह है,जिसमे हम अपने आप को खुद ही कैद कर लेते
है, बहार निकलने का रास्ता जब ही मिलता जब हम खुद तय कर ले अब बहुत हुआ
बहुत तकलीफ उठा ली अब हमें बहार निकलना है, बहार निकलने से पहले एक महत्वपूर्ण
कदम उठाना पपड़ेगा है कि हमें स्वीकार करना पड़ेगा कि पुरे मन से शरिर से
आत्मा से कि मै हकलाती हू . ये कोई आसान काम नहीं है पर इसके आलावा कोई
विकल्प भी नहीं है , जब तक हम स्वीकार नहीं करते जब तक गुफा से बहार
निकलने कि प्रक्रिया शुरू नही होती है, इस अँधेरी गुफा के अंदर जबतक
चेतना कि किरण नहीं लाते तबतक हम यही भटकते रहते है, चेतना का मतलब है अपने
हकलाने और उससे जुडी हजारों समस्याओ को पुरे होशो हवास में समझना और
स्वीकार करना, एक बार जब हमारी चेतना इस गुफा में शामिल होती है तो हम देख
पते है कि हम क्या कर रहे है जाने अजनाने में ,और उसे बेहतर कैसे बनाया जा
सकता है , और इस तरह एक रोचक सफर शुरू होता है, इस एडवेंचर भरे सफर पर आप
चलने को तैयार है, अगर हा तो थे द इंडियन स्टेमरिंग एसोसिएसन यानि टीसा से
संपर्क करे क्योकि हम सब साथ चलेंगे अभी अप्रेल में देहरादून में एक मुफ्त
शिविर लगने वाला है|
हमलोग जो हकलाते है इसमें बहुत बड़ा योगदान दे सकते है |
ये लेख सचिन जी से प्रेरित है
हिंदी लिखे क्योकि हम भारतीय है|

Post Author: Harish Usgaonker

5 thoughts on “From our FB page”

    admin

    (March 4, 2013 - 2:54 pm)

    बहुत खूब स्वाती जी,
    एकदम सही कहा आपने ।
    मैं भी जब पहली बार जुलाई-12 में दिल्ली वर्कशॉप में शामिल हुआ और जे.पी.सुंडा जी के नेतृत्व में एक एक्टिविटी मे राह चलते लोगो से हकलाहट से संबंधित प्रश्न पूछे तो समझ मे आया कि जिस हकलाने से हमको इतना डर, शरम, ग्लानि और घृणा है , उसे एक आम आदमी कितना सामान्य तौर पर लेता है । मुझे उस एक्टिविटी के दौरान (जब हम लोगो को हकलाहट के बारे मे जागरुक कर रहे थे)हमारे समूह के लिये एक प्रोढ की टिप्पणी आज भी याद है- "बेटा आप लोग बहुत अच्छा काम कर रहे हो, भगवान आपको सफ़लता दे ।"
    So just try at least one communication workshop. It may change whole attitude toward stammering. It may unload from head, the emotional baggage of fear,hatred, shame & guilt

    Sachin

    (March 5, 2013 - 1:41 am)

    जे पी – बहुत बहुत धन्यवाद |
    ऊपर पीयूश का पोस्ट देखा ? तुम ने पुणे मे जो दिया जलाया वह रोशनी फैला रहा है-
    उसकी रोशनी मे बहुत से लोग अपनी राह तलाश रहे हैं..

    admin

    (March 5, 2013 - 7:08 am)

    बहुत सुंदर विचार हैं। हिंदी में लेखन के लिए बधाई और आभार। हकलाहट पर अपने अनुभव ब्लॉग पर साझा करती रहें।

    admin

    (March 5, 2013 - 2:08 pm)

    very good sawati…waise bhi mujhe jyada bolne ki zarurat nahi hai…tumne khud hi itna kuch bol diya hai

    admin

    (March 6, 2013 - 5:18 am)

    Jaise hamara jindgi ka safar hai, waisa hi kutch haklahat ka safar hai. Ise meditation ki tarah le. Phir yeh kutch kutch samajh aane lagta hai.
    Bahut achcha Sawati ji. Aise hi apne vichar humse share karte rahe.

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